श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.64.7 
पदशब्दं तु मे श्रुत्वा मुनिर्वाक्यमभाषत।
किं चिरायसि मे पुत्र पानीयं क्षिप्रमानय॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मेरे कदमों की आहट सुनकर ऋषि बोले, 'बेटा! इतनी देर क्यों कर रहे हो? जल्दी से पानी लाओ।'
 
Hearing the sound of my footsteps the sage said, 'Son! Why are you taking so long? Bring water quickly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)