श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 69-70h
 
 
श्लोक  2.64.69-70h 
पद्मपत्रेक्षणं सुभ्रु सुदंष्ट्रं चारुनासिकम्॥ ६९॥
धन्या द्रक्ष्यन्ति रामस्य ताराधिपसमं मुखम्।
 
 
अनुवाद
'जो लोग कमल के समान नेत्रों, सुन्दर भौंहों, स्वच्छ दांतों और मनमोहक नासिका से सुशोभित श्री रामजी के चन्द्रमा के समान मुख को देखेंगे, वे धन्य हैं।' 69 1/2
 
'Blessed are those who will see the moon-like face of Sri Rama, adorned with lotus-like eyes, beautiful eyebrows, clean teeth and a charming nose.' 69 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)