श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  2.64.63-64h 
न तन्मे सदृशं देवि यन्मया राघवे कृतम्॥ ६३॥
सदृशं तत्तु तस्यैव यदनेन कृतं मयि।
 
 
अनुवाद
देवी! मैंने श्री राम के साथ जो व्यवहार किया, वह मेरे योग्य नहीं था; किन्तु श्री राम ने मेरे साथ जो व्यवहार किया, वह पूर्णतः उनके योग्य है।
 
Devi! The way I have behaved with Shri Ram was not worthy of me; but the way Shri Ram has behaved with me is completely worthy of him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)