श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 62-63h
 
 
श्लोक  2.64.62-63h 
यमक्षयमनुप्राप्ता द्रक्ष्यन्ति नहि मानवा:।
यदि मां संस्पृशेद् राम: सकृदन्वारभेत वा॥ ६२॥
धनं वा यौवराज्यं वा जीवेयमिति मे मति:।
 
 
अनुवाद
'जो लोग यमलोक (मृत्युलोक) जाने वाले हैं, वे अपने स्वजनों को नहीं देख पाते। यदि श्री राम आकर मुझे एक बार स्पर्श कर लें अथवा यह धन, वैभव और युवराज पद स्वीकार कर लें, तो मुझे विश्वास है कि मैं जीवित रह सकता हूँ।'
 
‘Those people who are about to go to Yamaloka (the world of death) are not able to see their relatives. If Shri Ram comes and touches me once or accepts this wealth and glory and the position of a crown prince, then I believe that I can live. 62 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)