श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.64.51 
स कृत्वाथोदकं तूर्णं तापस: सह भार्यया।
मामुवाच महातेजा: कृताञ्जलिमुपस्थितम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन महाप्रतापी तपस्वी मुनि ने अपनी पत्नी सहित तुरन्त ही अपने पुत्र को जल पिलाया और हाथ जोड़कर खड़े होकर मुझसे कहा -॥51॥
 
'Thereafter that greatly illustrious ascetic sage along with his wife immediately offered water to his son and standing with folded hands said to me -॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)