श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.64.46 
एवं स कृपणं तत्र पर्यदेवयतासकृत्।
ततोऽस्मै कर्तुमुदकं प्रवृत्त: सह भार्यया॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वह बार-बार दयनीय भाव से विलाप करने लगा। तत्पश्चात् वह अपनी पत्नी सहित अपने पुत्र को जल पिलाने के लिए आगे बढ़ा।
 
‘In this manner he began to lament repeatedly in a pitiable mood. Thereafter, along with his wife, he proceeded to offer water to his son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)