श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.64.42 
यां गतिं सगर: शैब्यो दिलीपो जनमेजय:।
नहुषो धुन्धुमारश्च प्राप्तास्तां गच्छ पुत्रक॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
'बेटा! तुम्हें भी वही गति प्राप्त हो जो राजा सगर, शैब्य, दिलीप, जनमेजय, नहुष और धुंधुमार को प्राप्त हुई है॥ 42॥
 
'Son! May you also attain the same fate that King Sagar, Shaibya, Dilip, Janamejaya, Nahush and Dhundhumar have attained.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)