श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.64.4 
तत्राहं दुर्बलावन्धौ वृद्धावपरिणायकौ।
अपश्यं तस्य पितरौ लूनपक्षाविव द्विजौ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर मैंने उनके दुर्बल, अंधे और वृद्ध माता-पिता को देखा, जिनका सहारा देने वाला कोई नहीं था। उनकी हालत कटे हुए पंख वाले दो पक्षियों जैसी थी।
 
'On reaching there I saw their frail, blind and old parents who had no one else to support them. Their condition was like that of two birds with clipped wings. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)