श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.64.37 
उभावपि च शोकार्तावनाथौ कृपणौ वने।
क्षिप्रमेव गमिष्यावस्त्वया हीनौ यमक्षयम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
"हम दोनों दुःखी, अनाथ और दुखी हैं। आपकी अनुपस्थिति में, हम शीघ्र ही यमलोक चले जायेंगे।"
 
"We are both grief-stricken, orphaned and miserable. In your absence, we will soon go to Yamaloka."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)