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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना
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श्लोक 30
श्लोक
2.64.30
नाभिवादयसे माद्य न च मामभिभाषसे।
किं च शेषे तु भूमौ त्वं वत्स किं कुपितो ह्यसि॥ ३०॥
अनुवाद
"बेटा! आज तुम न तो मुझे नमस्कार करते हो और न मुझसे बोलते हो। तुम भूमि पर क्यों सो रहे हो? क्या तुम हम पर क्रोधित हो?॥30॥
"Son! Today you neither greet me nor speak to me. Why are you sleeping on the ground? Are you angry with us?॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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