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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना
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श्लोक 29
श्लोक
2.64.29
तौ पुत्रमात्मन: स्पृष्ट्वा तमासाद्य तपस्विनौ।
निपेततु: शरीरेऽस्य पिता चैनमुवाच ह॥ २९॥
अनुवाद
'दोनों तपस्वी अपने पुत्र का स्पर्श करके उसके बहुत निकट गए और उसके शरीर पर गिर पड़े। तब पिता ने पुत्र को संबोधित करके उससे कहा -॥29॥
'The two ascetics, after touching their son, went very close to him and fell on his body. Then the father addressed the son and said to him -॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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