श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.64.25 
अज्ञानाद्धि कृतं यस्मादिदं ते तेन जीवसे।
अपि ह्यकुशलं न स्याद् राघवाणां कुतो भवान्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
"तुमने अनजाने में यह पाप किया है, इसीलिए तुम अभी तक जीवित हो। यदि तुमने यह पाप जानकर किया होता, तो सारा रघुवंश नष्ट हो जाता, केवल तुम्हारा क्या होगा?"॥ 25॥
 
"You have committed this sin unknowingly, that is why you are still alive. If you had done it knowingly, then the entire Raghuvanshi clan would have been destroyed, what about you alone?"॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)