श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.64.16 
गत्वा तस्यास्ततस्तीरमपश्यमिषुणा हृदि।
विनिर्भिन्नं गतप्राणं शयानं भुवि तापसम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
"तब मैं सरयू नदी के तट पर गया और देखा कि मेरा बाण एक तपस्वी की छाती में लगा था और वह लगभग मृत अवस्था में भूमि पर पड़ा था।
 
"Then I went to the bank of river Sarayu and saw that my arrow had pierced the chest of an ascetic and he was lying on the ground almost dead.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)