श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.64.13 
क्षत्रियोऽहं दशरथो नाहं पुत्रो महात्मन:।
सज्जनावमतं दु:खमिदं प्राप्तं स्वकर्मजम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
"महात्मा! मैं आपका पुत्र नहीं हूँ, मैं दशरथ नाम का क्षत्रिय हूँ। अपने कर्म के कारण मुझे ऐसा दुःख मिला है, जिसकी सज्जन पुरुषों द्वारा सदैव निंदा की जाती रही है॥13॥
 
"Mahatma! I am not your son, I am a Kshatriya named Dasharath. Due to my karma, I have suffered such misery, which has always been condemned by the noble men.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)