श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.64.12 
मनस: कर्म चेष्टाभिरभिसंस्तभ्य वाग्बलम्।
आचचक्षे त्वहं तस्मै पुत्रव्यसनजं भयम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'बाह्य कर्मों द्वारा अपने मानसिक भय का दमन करके मैंने कुछ कहने की क्षमता प्राप्त की और ऋषि को उनके पुत्र की मृत्यु के कारण उन पर जो संकट आया था, उसे बताते हुए मैंने कहा-॥12॥
 
'By suppressing my mental fear by external actions, I gained the ability to say something and revealing to the sage the trouble that had fallen on him due to the death of his son, I said -॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)