Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.63.9: 'जो मनुष्य अपने कर्मों के फल को बिना सोचे-समझे और बिना जाने ही केवल उन्हें करने की ओर दौड़ता है, वह फल भोगने के समय उसी प्रकार दुःखी होता है, जैसे आम के वृक्ष को काटकर पलाश के वृक्ष को सींचने वाला दुःखी होता है॥9॥   |   ramayan सर्ग 2.63: राजा दशरथ का शोक और उनका कौसल्या से अपने द्वारा मुनि कुमार के मारे जाने का प्रसङ्ग सुनाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 63: राजा दशरथ का शोक और उनका कौसल्या से अपने द्वारा मुनि कुमार के मारे जाने का प्रसङ्ग सुनाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.63.9 
अविज्ञाय फलं यो हि कर्म त्वेवानुधावति।
स शोचेत् फलवेलायां यथा किंशुकसेचक:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'जो मनुष्य अपने कर्मों के फल को बिना सोचे-समझे और बिना जाने ही केवल उन्हें करने की ओर दौड़ता है, वह फल भोगने के समय उसी प्रकार दुःखी होता है, जैसे आम के वृक्ष को काटकर पलाश के वृक्ष को सींचने वाला दुःखी होता है॥9॥
 
'He who without thinking or knowing about the results of his actions only runs towards performing them, at the time of receiving the results feels sad in the same way as the one who cuts a mango tree and then waters the Palaash tree.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)