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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 63: राजा दशरथ का शोक और उनका कौसल्या से अपने द्वारा मुनि कुमार के मारे जाने का प्रसङ्ग सुनाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.63.6 
यदाचरति कल्याणि शुभं वा यदि वाशुभम्।
तदेव लभते भद्रे कर्ता कर्मजमात्मन:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'कल्याणि! मनुष्य जो भी कर्म करता है, चाहे वह शुभ हो या अशुभ, भद्रे! कर्ता अपने कर्मों के फलस्वरूप सुख या दुःख प्राप्त करता है। 6॥
 
'Kalyani! Whatever action a person does, whether auspicious or inauspicious, Bhadre! The doer receives happiness or sorrow as a result of his actions. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)