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ramayan 2.63.53: जल में गिरने के कारण उसका सम्पूर्ण शरीर भीग गया था। उसके प्राणों में चोट लगने के कारण वह अत्यन्त पीड़ा से कराहता हुआ और बार-बार आहें भरता हुआ प्राण त्यागने लगा। कल्याणी कौसल्ये! उस ऋषिपुत्र को सरयू के तट पर उस अवस्था में मृत पड़ा देखकर मुझे बड़ा दुःख हुआ॥ 53॥   |   ramayan सर्ग 2.63: राजा दशरथ का शोक और उनका कौसल्या से अपने द्वारा मुनि कुमार के मारे जाने का प्रसङ्ग सुनाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 63: राजा दशरथ का शोक और उनका कौसल्या से अपने द्वारा मुनि कुमार के मारे जाने का प्रसङ्ग सुनाना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.63.53 
जलार्द्रगात्रं तु विलप्य कृच्छ्रं
मर्मव्रणं संततमुच्छ्वसन्तम्।
तत: सरय्वां तमहं शयानं
समीक्ष्य भद्रे सुभृशं विषण्ण:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जल में गिरने के कारण उसका सम्पूर्ण शरीर भीग गया था। उसके प्राणों में चोट लगने के कारण वह अत्यन्त पीड़ा से कराहता हुआ और बार-बार आहें भरता हुआ प्राण त्यागने लगा। कल्याणी कौसल्ये! उस ऋषिपुत्र को सरयू के तट पर उस अवस्था में मृत पड़ा देखकर मुझे बड़ा दुःख हुआ॥ 53॥
 
‘His entire body was wet due to falling in the water. Due to the injury in his vital organs, he gave up his life by wailing in great pain and sighing repeatedly. Kalyani Kausalye! I felt very sad to see the sage's son lying dead on the banks of the Sarayu in that condition.'॥ 53॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे त्रिषष्टितम: सर्ग:॥ ६३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें तिरसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६३॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)