जल में गिरने के कारण उसका सम्पूर्ण शरीर भीग गया था। उसके प्राणों में चोट लगने के कारण वह अत्यन्त पीड़ा से कराहता हुआ और बार-बार आहें भरता हुआ प्राण त्यागने लगा। कल्याणी कौसल्ये! उस ऋषिपुत्र को सरयू के तट पर उस अवस्था में मृत पड़ा देखकर मुझे बड़ा दुःख हुआ॥ 53॥
‘His entire body was wet due to falling in the water. Due to the injury in his vital organs, he gave up his life by wailing in great pain and sighing repeatedly. Kalyani Kausalye! I felt very sad to see the sage's son lying dead on the banks of the Sarayu in that condition.'॥ 53॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे त्रिषष्टितम: सर्ग:॥ ६३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें तिरसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)