Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.63.51-52: "पुरुषोत्तम! मैं एक शूद्र माता के गर्भ से वैश्य पिता के यहाँ उत्पन्न हुआ हूँ।" बाण के कारण हुए गहरे घाव के कारण वह बड़ी कठिनाई से इतना ही कह पा रहा था। उसकी आँखें घूम रही थीं। वह हिल-डुल नहीं पा रहा था। वह भूमि पर पड़ा तड़प रहा था और अत्यन्त पीड़ा अनुभव कर रहा था। उसी अवस्था में मैंने उसके शरीर से वह बाण निकाल दिया। तब उस तपस्वी ने अत्यन्त भयभीत होकर मेरी ओर देखते ही प्राण त्याग दिए। | ramayan सर्ग 2.63: राजा दशरथ का शोक और उनका कौसल्या से अपने द्वारा मुनि कुमार के मारे जाने का प्रसङ्ग सुनाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
"पुरुषोत्तम! मैं एक शूद्र माता के गर्भ से वैश्य पिता के यहाँ उत्पन्न हुआ हूँ।" बाण के कारण हुए गहरे घाव के कारण वह बड़ी कठिनाई से इतना ही कह पा रहा था। उसकी आँखें घूम रही थीं। वह हिल-डुल नहीं पा रहा था। वह भूमि पर पड़ा तड़प रहा था और अत्यन्त पीड़ा अनुभव कर रहा था। उसी अवस्था में मैंने उसके शरीर से वह बाण निकाल दिया। तब उस तपस्वी ने अत्यन्त भयभीत होकर मेरी ओर देखते ही प्राण त्याग दिए।
"Best of men! I was born to a Vaishya father from the womb of a Shudra mother." He could only say this with great difficulty due to the deep wound caused by the arrow. His eyes were rolling. He was unable to move. He was lying on the ground and was struggling and was experiencing extreme pain. In that state I removed that arrow from his body. Then, being very frightened, that ascetic gave up his life after looking at me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥