Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.63.24-25: प्रातःकाल का समय था। ज्यों ही मैंने विषैले सर्प के समान तीक्ष्ण बाण छोड़ा, त्यों ही मुझे जल में गिरते हुए एक वनवासी का विलाप स्पष्ट सुनाई देने लगा। मेरा बाण उसके हृदय में बड़ी पीड़ा पहुँचा रहा था। जब वह पुरुष नीचे गिरा, तब वहाँ यह मानवी वाणी प्रकट हुई - सुनाई देने लगी -॥24-25॥ | ramayan सर्ग 2.63: राजा दशरथ का शोक और उनका कौसल्या से अपने द्वारा मुनि कुमार के मारे जाने का प्रसङ्ग सुनाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रातःकाल का समय था। ज्यों ही मैंने विषैले सर्प के समान तीक्ष्ण बाण छोड़ा, त्यों ही मुझे जल में गिरते हुए एक वनवासी का विलाप स्पष्ट सुनाई देने लगा। मेरा बाण उसके हृदय में बड़ी पीड़ा पहुँचा रहा था। जब वह पुरुष नीचे गिरा, तब वहाँ यह मानवी वाणी प्रकट हुई - सुनाई देने लगी -॥24-25॥
‘It was the morning time. As soon as I shot that sharp arrow like a poisonous snake, I could clearly hear the wailing of a forest dweller falling into the water. My arrow was causing great pain to his core. When that man fell down, this human voice appeared there – started to be heard –॥ 24-25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥