ततोऽहं शरमुद्धृत्य दीप्तमाशीविषोपमम्।
शब्दं प्रति गजप्रेप्सुरभिलक्ष्यमपातयम्॥ २३॥
अनुवाद
तब मैंने सोचा कि हाथी अपनी सूँड़ में जल खींच रहा होगा; अतः मेरे बाण का लक्ष्य वही होगा। मैंने तरकश से एक बाण निकाला और उसे हाथी पर निशाना लगाकर छोड़ दिया। वह चमकता हुआ बाण विषैले सर्प के समान भयंकर था॥ 23॥
‘Then I thought that the elephant must be drawing water in its trunk; hence it will be the target of my arrow. I took out an arrow from the quiver and aimed it at the elephant and shot it. That shining arrow was as dangerous as a poisonous snake.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥