श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 63: राजा दशरथ का शोक और उनका कौसल्या से अपने द्वारा मुनि कुमार के मारे जाने का प्रसङ्ग सुनाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.63.19 
पाण्डुरारुणवर्णानि स्रोतांसि विमलान्यपि।
सुस्रुवुर्गिरिधातुभ्य: सभस्मानि भुजंगवत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
पर्वतों से गिरने वाले झरने, यद्यपि स्वच्छ थे, फिर भी पर्वतीय धातुओं के संपर्क में आने पर श्वेत, लाल और राख के रंग के हो गए और सर्पों के समान टेढ़े-मेढ़े ढंग से बहने लगे॥19॥
 
‘The springs or waterfalls falling from the mountains, though crystal clear, on coming in contact with the mountain metals, became white, red and ash-coloured and were flowing in a crooked manner like snakes.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)