Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.63.12: 'देवी! मुझे अपने ही दुष्कर्म का फल इस महान दुःख के रूप में मिला है। जैसे कोई बालक अज्ञानवश विष खा लेता है तो वह विष उसे मार डालता है, उसी प्रकार मैं यहाँ आसक्ति या अज्ञानवश किए गए दुष्कर्मों का फल भोग रहा हूँ। | ramayan सर्ग 2.63: राजा दशरथ का शोक और उनका कौसल्या से अपने द्वारा मुनि कुमार के मारे जाने का प्रसङ्ग सुनाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'देवी! मुझे अपने ही दुष्कर्म का फल इस महान दुःख के रूप में मिला है। जैसे कोई बालक अज्ञानवश विष खा लेता है तो वह विष उसे मार डालता है, उसी प्रकार मैं यहाँ आसक्ति या अज्ञानवश किए गए दुष्कर्मों का फल भोग रहा हूँ।
‘Devi! I have received the result of my own misdeed in the form of this great sorrow. Just as if a child eats poison due to ignorance, that poison kills him, similarly I am suffering the result of the misdeeds done due to attachment or ignorance here.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥