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ramayan 2.62.5: उस शोक से तथा श्री रामजी के शोक से भी राजा के हृदय में बड़ी पीड़ा हुई। महाराज दोनों शोकों से व्याकुल होने लगे॥5॥   |   ramayan सर्ग 2.62: दुःखी हुए राजा दशरथ का कौसल्या को हाथ जोड़कर मनाना और कौसल्या का उनके चरणों में पड़कर क्षमा माँगना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 62: दुःखी हुए राजा दशरथ का कौसल्या को हाथ जोड़कर मनाना और कौसल्या का उनके चरणों में पड़कर क्षमा माँगना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.62.5 
अमनास्तेन शोकेन रामशोकेन च प्रभु:।
द्वाभ्यामपि महाराज: शोकाभ्यामभितप्यते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस शोक से तथा श्री रामजी के शोक से भी राजा के हृदय में बड़ी पीड़ा हुई। महाराज दोनों शोकों से व्याकुल होने लगे॥5॥
 
That grief and the grief of Shri Ram also caused great pain in the king's heart. Maharaja started getting distressed due to both the griefs. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)