सा नूनं तरुणी श्यामा सुकुमारी सुखोचिता।
कथमुष्णं च शीतं च मैथिली विसहिष्यते॥ ४॥
अनुवाद
वह सोलह-अठारह वर्ष की सुकुमारी युवती सीता, मिथिला की पुत्री, जो केवल सुख भोगने के योग्य है, वन में शीत और उष्णता का कष्ट कैसे सहन करेगी?॥4॥
‘How will that sixteen-eighteen year old delicate young girl, Sita, daughter of Mithila, who is fit only to enjoy happiness, endure the pain of cold and heat in the forest?॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥