श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 60: कौसल्या का विलाप और सारथि सुमन्त्र का उन्हें समझाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.60.3 
निवर्तय रथं शीघ्रं दण्डकान् नय मामपि।
अथ तान् नानुगच्छामि गमिष्यामि यमक्षयम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'शीघ्र रथ लौटा दो और मुझे भी दण्डकारण्य ले चलो। यदि मैं वहाँ न जा सकूँ, तो यमलोक की यात्रा करूँगा।'॥3॥
 
'Return the chariot quickly and take me also to Dandakaranya. If I am not able to go there, then I will travel to Yamaloka.'॥ 3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd