श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 60: कौसल्या का विलाप और सारथि सुमन्त्र का उन्हें समझाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.60.20 
गजं वा वीक्ष्य सिंहं वा व्याघ्रं वा वनमाश्रिता।
नाहारयति संत्रासं बाहू रामस्य संश्रिता॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'भगवान राम के भुजबल पर भरोसा करके वह वन में रहती है और हाथी, व्याघ्र या सिंह को देखकर भी कभी नहीं डरती।॥ 20॥
 
'Relying on the physical strength of Lord Rama, she lives in the forest and is never afraid of even seeing an elephant, tiger or lion.॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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