श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 60: कौसल्या का विलाप और सारथि सुमन्त्र का उन्हें समझाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.60.13 
रामं वा लक्ष्मणं वापि दृष्ट्वा जानाति जानकी।
अयोध्या क्रोशमात्रे तु विहारमिव साश्रिता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
श्री राम और लक्ष्मण को अपने निकट देखकर जानकी को ऐसा लगा मानो वह अयोध्या से लगभग एक कोस दूर किसी स्थान पर केवल घूमने के लिए आई हों।
 
Seeing Sri Rama and Lakshman near her, Janaki felt as if she had come to a place about a kos (mile) away from Ayodhya only for a stroll.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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