| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 60: कौसल्या का विलाप और सारथि सुमन्त्र का उन्हें समझाना » श्लोक 10 |
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| | | | श्लोक 2.60.10  | बालेव रमते सीताबालचन्द्रनिभानना।
रामा रामे ह्यदीनात्मा विजनेऽपि वने सती॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | पूर्ण चन्द्रमा के समान मनोहर मुख वाली, उदार हृदय वाली, पतिव्रता और सदाचारिणी महान् नारी सीता उस निर्जन वन में भी भगवान् राम के पास बालक के समान क्रीड़ा करती और प्रसन्न रहती हैं॥ 10॥ | | | | ‘Sita, the beautiful lady with a face as charming as the full moon, the great lady with a generous heart, chaste and virtuous, plays and remains happy like a child near Lord Rama even in that deserted forest.॥ 10॥ | | ✨ ai-generated | | |
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