श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 59: सुमन्त्र द्वारा श्रीराम के शोक से जडचेतन एवं अयोध्यापुरी की दुरवस्था का वर्णन तथा राजा दशरथ का विलाप  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.59.5 
उपतप्तोदका नद्य: पल्वलानि सरांसि च।
परिशुष्कपलाशानि वनान्युपवनानि च॥ ५॥
 
 
अनुवाद
नदियों, छोटे जलाशयों और बड़ी झीलों का पानी गर्म हो गया है। जंगलों और बगीचों के पत्ते सूख गए हैं।
 
‘The water of rivers, small reservoirs and large lakes has become warm. The leaves of forests and gardens have dried up.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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