श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 59: सुमन्त्र द्वारा श्रीराम के शोक से जडचेतन एवं अयोध्यापुरी की दुरवस्था का वर्णन तथा राजा दशरथ का विलाप  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.59.17 
सूतस्य वचनं श्रुत्वा वाचा परमदीनया।
बाष्पोपहतया सूतमिदं वचनमब्रवीत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
सुमन्त्र के वचन सुनकर राजा ने अश्रुपूरित अत्यन्त विनम्र वाणी में उनसे कहा- 17॥
 
Hearing the words of Sumantra, the king said to him in a very humble voice filled with tears - 17॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd