श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 58: महाराज दशरथ की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम और लक्ष्मण के संदेश सुनाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.58.33 
सर्वप्रजाभिरामं हि रामं प्रव्रज्य धार्मिकम्।
सर्वलोकविरोधेन कथं राजा भविष्यति॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
'जिनमें समस्त प्रजा प्रसन्न होती है, उन धर्मात्मा श्री राम को वनवास देकर और सम्पूर्ण जगत् से विरोध करके अब वह राजा कैसे बन सकता है?॥ 33॥
 
'How can he now become king, having exiled the virtuous Shri Ram, in whom all subjects delight, and having opposed the whole world?॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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