श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 58: महाराज दशरथ की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम और लक्ष्मण के संदेश सुनाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.58.27 
राज्ञा तु खलु कैकेय्या लघु चाश्रुत्य शासनम्।
कृतं कार्यमकार्यं वा वयं येनाभिपीडिता:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कैकेयी की आज्ञा सुनते ही राजा ने तुरन्त ही उसे पूरा करने की प्रतिज्ञा की। चाहे उनका कार्य उचित हो या अनुचित, उसका फल हम सबको भोगना ही पड़ेगा॥ 27॥
 
‘On hearing Kaikeyi's order, the king immediately vowed to carry it out. Whether his action was right or wrong, we all have to suffer because of it.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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