श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 58: महाराज दशरथ की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम और लक्ष्मण के संदेश सुनाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.58.22 
वक्तव्यश्च महाबाहुरिक्ष्वाकुकुलनन्दन:।
पितरं यौवराज्यस्थो राज्यस्थमनुपालय॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'इक्ष्वाकुकुल का सुख बढ़ाने वाले महाबाहु भरत से भी यही कहना चाहिए कि युवराज पद पर अभिषिक्त होने पर भी आप राज्यसिंहासन पर आसीन अपने पिता की सेवा और रक्षा में लगे रहें। 22॥
 
'It should also be said to the mighty-armed Bharat, who enhances the happiness of Ikshvakukul, that even after being anointed as the crown prince, you should remain engaged in the protection and service of your father who is seated on the throne of the kingdom. 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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