श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 58: महाराज दशरथ की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम और लक्ष्मण के संदेश सुनाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.58.21 
भरत: कुशलं वाच्यो वाच्यो मद्वचनेन च।
सर्वास्वेव यथान्यायं वृत्तिं वर्तस्व मातृषु॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार भरत से मेरा कुशल-क्षेम कहना और मेरी ओर से उनसे कहना - 'भैया! तुम सब माताओं के साथ न्यायपूर्वक व्यवहार करते रहो॥ 21॥
 
'Tell prince Bharat about my well-being and tell him on my behalf - 'Brother! You should continue to behave justly towards all mothers.॥ 21॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas