श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 58: महाराज दशरथ की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम और लक्ष्मण के संदेश सुनाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.58.19 
अभिमानं च मानं च त्यक्त्वा वर्तस्व मातृषु।
अनुराजानमार्यां च कैकेयीमम्ब कारय॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'अभिमान और अहंकार त्यागकर सब माताओं को समान समझो और उनके साथ सद्भाव से रहो। अम्बे! राजा की प्रिय कैकेयी को श्रेष्ठ समझो और उसका आदर करो।॥19॥
 
‘Give up pride and ego and treat all mothers equally and live in harmony with them. Ambe! Consider Kaikeyi, who is loved by the king, to be superior and honour her.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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