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ramayan 2.57.25: सुमन्तराम वहाँ बैठे महाराज के पास गये, उन्हें प्रणाम किया और जो कुछ श्री राम ने कहा था, वह सब उनसे कहा।   |   ramayan सर्ग 2.57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.57.25 
अभिगम्य तमासीनं राजानमभिवाद्य च।
सुमन्त्रो रामवचनं यथोक्तं प्रत्यवेदयत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
सुमन्तराम वहाँ बैठे महाराज के पास गये, उन्हें प्रणाम किया और जो कुछ श्री राम ने कहा था, वह सब उनसे कहा।
 
Sumantram went to the Maharaja sitting there, bowed to him and told him exactly what Shri Ram had said. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)