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ramayan 2.57.17: राजमहल पहुँचकर वह शीघ्रता से रथ से उतरा, अन्दर गया और बहुत से लोगों से भरी सात गाड़ियों को पार किया।   |   ramayan सर्ग 2.57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.57.17 
सोऽवतीर्य रथाच्छीघ्रं राजवेश्म प्रविश्य च।
कक्ष्या: सप्ताभिचक्राम महाजनसमाकुला:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजमहल पहुँचकर वह शीघ्रता से रथ से उतरा, अन्दर गया और बहुत से लोगों से भरी सात गाड़ियों को पार किया।
 
On reaching the royal palace he quickly alighted from the chariot, entered inside and crossed seven carriages filled with many people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)