Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.57.14: 'कौन सी वस्तु अमुक व्यक्ति के लिए उपयोगी है ? कौन सी वस्तु उसे सुख देगी ? और कौन सी वस्तुएँ उसे सुख देंगी, इत्यादि, ऐसा विचार करके श्री रामचंद्रजी ने पिता के समान इस नगर का पालन किया ॥14॥ | ramayan सर्ग 2.57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'कौन सी वस्तु अमुक व्यक्ति के लिए उपयोगी है ? कौन सी वस्तु उसे सुख देगी ? और कौन सी वस्तुएँ उसे सुख देंगी, इत्यादि, ऐसा विचार करके श्री रामचंद्रजी ने पिता के समान इस नगर का पालन किया ॥14॥
'Which thing is useful for a certain person? What will make him happy? And which things will give him happiness, etc., thinking about these things, Shri Ramchandraji looked after this city like a father.'॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥