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ramayan 2.56.33: रघुनाथ ने अपनी छोटी सी कुटिया के अनुरूप वेदस्थल (आठ दिक्पालों के लिए बलि देने का स्थान), चैत्य (गणेश और अन्य देवताओं के लिए स्थान) और आयतन (विष्णु और अन्य देवताओं के लिए स्थान) का निर्माण और स्थापना की।   |   ramayan सर्ग 2.56: श्रीराम आदि का चित्रकूट में पहुँचना, वाल्मीकिजी का दर्शन करके श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मणद् वारा पर्णशाला का निर्माण,सबका कुटी में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.56.33 
वेदिस्थलविधानानि चैत्यान्यायतनानि च।
आश्रमस्यानुरूपाणि स्थापयामास राघव:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
रघुनाथ ने अपनी छोटी सी कुटिया के अनुरूप वेदस्थल (आठ दिक्पालों के लिए बलि देने का स्थान), चैत्य (गणेश और अन्य देवताओं के लिए स्थान) और आयतन (विष्णु और अन्य देवताओं के लिए स्थान) का निर्माण और स्थापना की।
 
Raghunath built and established vedasthals (places for offering sacrifices to the eight Dikpalas), chaityas (places for Ganesha and others) and ayatans (places for Vishnu and other gods) in accordance with his small hut.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)