श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 56: श्रीराम आदि का चित्रकूट में पहुँचना, वाल्मीकिजी का दर्शन करके श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मणद् वारा पर्णशाला का निर्माण,सबका कुटी में प्रवेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.56.3 
प्रसुप्तस्तु ततो भ्रात्रा समये प्रतिबोधित:।
जहौ निद्रां च तन्द्रां च प्रसक्तं च परिश्रमम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जब सोये हुए लक्ष्मण को उनके बड़े भाई ने ठीक समय पर जगाया तो उनकी नींद, आलस्य और चलने की थकान दूर हो गई।
 
When the sleeping Lakshman was awakened at the right time by his elder brother, he got rid of his sleep, laziness and the fatigue of walking. 3.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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