श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 56: श्रीराम आदि का चित्रकूट में पहुँचना, वाल्मीकिजी का दर्शन करके श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मणद् वारा पर्णशाला का निर्माण,सबका कुटी में प्रवेश  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.56.15 
मुनयश्च महात्मानो वसन्त्यस्मिन् शिलोच्चये।
अयं वासो भवेत् तात वयमत्र वसेमहि॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस पर्वत पर अनेक महात्मा और मुनि निवास करते हैं। तात! यह हमारा निवासस्थान होने के योग्य है। हम यहीं निवास करेंगे। 15॥
 
‘Many Mahatma and Muni reside on this mountain. Tat! This deserves to be our abode. We will reside here. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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