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ramayan 2.56.10: यह चित्रकूट पर्वत है - इसकी चोटी बहुत ऊँची है। हाथियों के झुंड उसी ओर जा रहे हैं और बहुत से पक्षी वहाँ कलरव कर रहे हैं॥10॥   |   ramayan सर्ग 2.56: श्रीराम आदि का चित्रकूट में पहुँचना, वाल्मीकिजी का दर्शन करके श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मणद् वारा पर्णशाला का निर्माण,सबका कुटी में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 56: श्रीराम आदि का चित्रकूट में पहुँचना, वाल्मीकिजी का दर्शन करके श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मणद् वारा पर्णशाला का निर्माण,सबका कुटी में प्रवेश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.56.10 
मातङ्गयूथानुसृतं पक्षिसंघानुनादितम्।
चित्रकूटमिमं पश्य प्रवृद्धशिखरं गिरिम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यह चित्रकूट पर्वत है - इसकी चोटी बहुत ऊँची है। हाथियों के झुंड उसी ओर जा रहे हैं और बहुत से पक्षी वहाँ कलरव कर रहे हैं॥10॥
 
‘This is the Chitrakoot mountain – its peak is very high. Herds of elephants are going in that direction and many birds are chirping there.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)