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ramayan 2.54.4: सुखपूर्वक यात्रा करते हुए, उठते-बैठते हुए उन तीनों ने फूलों से सुशोभित नाना प्रकार के वृक्षों को देखा। जब दिन लगभग ढल गया, तब श्री राम ने लक्ष्मण से कहा-॥4॥   |   ramayan सर्ग 2.54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.54.4 
यथा क्षेमेण सम्पश्यन् पुष्पितान् विविधान् द्रुमान्।
निर्वृत्तमात्रे दिवसे राम: सौमित्रिमब्रवीत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सुखपूर्वक यात्रा करते हुए, उठते-बैठते हुए उन तीनों ने फूलों से सुशोभित नाना प्रकार के वृक्षों को देखा। जब दिन लगभग ढल गया, तब श्री राम ने लक्ष्मण से कहा-॥4॥
 
While travelling comfortably, getting up and sitting down, the three of them saw various trees decorated with flowers. When the day was almost over, then Shri Ram said to Lakshman -॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)