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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.54.31 
ऋषयस्तत्र बहवो विहृत्य शरदां शतम्।
तपसा दिवमारूढा: कपालशिरसा सह॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
'वहाँ बहुत से ऋषिगण, जिनके बाल वृद्धावस्था के कारण खोपड़ी के समान सफेद हो गए थे, सैकड़ों वर्षों तक तपस्या करने के बाद स्वर्ग को चले गए हैं।
 
'There many sages, whose hair had become as white as the skull due to old age, have gone to heaven after playing in tapasya for hundreds of years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)