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ramayan 2.54.30: जब कोई मनुष्य चित्रकूट की चोटियों को देखता है, तो उसे अपने पुण्य और परोपकारी कर्मों का फल प्राप्त होता है और वह कभी पाप नहीं करता ॥30॥   |   ramayan सर्ग 2.54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.54.30 
यावता चित्रकूटस्य नर: शृङ्गाण्यवेक्षते।
कल्याणानि समाधत्ते न पापे कुरुते मन:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जब कोई मनुष्य चित्रकूट की चोटियों को देखता है, तो उसे अपने पुण्य और परोपकारी कर्मों का फल प्राप्त होता है और वह कभी पाप नहीं करता ॥30॥
 
When a person sees the peaks of Chitrakoot, he receives the fruits of his pious and benevolent deeds and never indulges in sins. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)