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ramayan 2.54.13-14: तत्पश्चात् लक्ष्मण के बड़े भाई श्री रघुनाथ ने उन्हें अपना परिचय इस प्रकार दिया - 'प्रभो! हम दोनों राजा दशरथ के पुत्र हैं। मेरा नाम राम है और उनका नाम लक्ष्मण है, और वे विदेहराज जनक की पुत्री तथा मेरी शुभ पत्नी, सती एवं पतिव्रता सीता हैं, जो एकांत तपोवन में भी मेरे साथ रहने आई हैं।॥ 13-14॥   |   ramayan सर्ग 2.54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  2.54.13-14 
न्यवेदयत चात्मानं तस्मै लक्ष्मणपूर्वज:।
पुत्रौ दशरथस्यावां भगवन् रामलक्ष्मणौ॥ १३॥
भार्या ममेयं कल्याणी वैदेही जनकात्मजा।
मां चानुयाता विजनं तपोवनमनिन्दिता॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् लक्ष्मण के बड़े भाई श्री रघुनाथ ने उन्हें अपना परिचय इस प्रकार दिया - 'प्रभो! हम दोनों राजा दशरथ के पुत्र हैं। मेरा नाम राम है और उनका नाम लक्ष्मण है, और वे विदेहराज जनक की पुत्री तथा मेरी शुभ पत्नी, सती एवं पतिव्रता सीता हैं, जो एकांत तपोवन में भी मेरे साथ रहने आई हैं।॥ 13-14॥
 
Thereafter, Lakshmana's elder brother Sri Raghunatha introduced himself to him thus - 'Lord! We both are sons of King Dasharatha. My name is Ram and his is Lakshmana and she is the daughter of Videhraj Janaka and my auspicious wife, the sati and virtuous Sita, who has come to accompany me even in the secluded Tapovan.॥ 13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)