Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.54.11-12: (दूर खड़े होकर, ऋषि के शिष्य को अपने आगमन की सूचना देकर और प्रवेश की अनुमति प्राप्त करके) पत्तल-कक्ष में प्रवेश करते ही उन्होंने एकाग्रचित्त और तीव्र व्रत वाले ऋषि भारद्वाज को देखा, जिन्होंने तप के प्रभाव से तीनों कालों की सभी वस्तुओं को देखने की दिव्य दृष्टि प्राप्त कर ली थी। वे अग्निहोत्र करके अपने शिष्यों से घिरे हुए आसन पर बैठे थे। ऋषि को देखकर, लक्ष्मण और सीता सहित सौभाग्यशाली राम ने हाथ जोड़कर उनके चरणों में प्रणाम किया।   |   ramayan सर्ग 2.54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  2.54.11-12 
स प्रविश्य महात्मानमृषिं शिष्यगणैर्वृतम्।
संशितव्रतमेकाग्रं तपसा लब्धचक्षुषम्॥ ११॥
हुताग्निहोत्रं दृष्ट्वैव महाभाग: कृताञ्जलि:।
राम: सौमित्रिणा सार्धं सीतया चाभ्यवादयत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
(दूर खड़े होकर, ऋषि के शिष्य को अपने आगमन की सूचना देकर और प्रवेश की अनुमति प्राप्त करके) पत्तल-कक्ष में प्रवेश करते ही उन्होंने एकाग्रचित्त और तीव्र व्रत वाले ऋषि भारद्वाज को देखा, जिन्होंने तप के प्रभाव से तीनों कालों की सभी वस्तुओं को देखने की दिव्य दृष्टि प्राप्त कर ली थी। वे अग्निहोत्र करके अपने शिष्यों से घिरे हुए आसन पर बैठे थे। ऋषि को देखकर, लक्ष्मण और सीता सहित सौभाग्यशाली राम ने हाथ जोड़कर उनके चरणों में प्रणाम किया।
 
(Standing at a distance, after informing the disciple of the sage about his arrival and obtaining permission to enter) entering the leaf-hall, he saw the sage Bharadwaj, who was of a concentrated mind and had a sharp vow, who had acquired the divine sight of seeing all the things of the three times through the effect of penance. He was seated on a seat surrounded by his disciples after performing Agnihotra. On seeing the sage, the fortunate Rama, along with Lakshmana and Sita, folded his hands and bowed at his feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)