vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन
»
श्लोक 10
श्लोक
2.54.10
ततस्त्वाश्रममासाद्य मुनेर्दर्शनकांक्षिणौ।
सीतयानुगतौ वीरौ दूरादेवावतस्थतु:॥ १०॥
अनुवाद
आश्रम में पहुँचकर सीता सहित वे दोनों वीर पुरुष ऋषि के दर्शन की इच्छा से दूर खड़े हो गए।
On reaching the hermitage, those two brave men along with Sita, desiring to see the sage, stood at a distance.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd
Download Vedamrit Android App
Install
×